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हनी ट्रैप / मप्र हाईकोर्ट का आदेश; एसआईटी 10 दिन में आयकर विभाग को सौंपे सभी दस्तावेज, सरकार 6 हफ्ते में बताए- सीबीआई जांच क्यों न हो

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इंदौर. प्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रैप मामले में अब आयकर विभाग का दखल बढ़ने जा रहा है। हाईकोर्ट ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को आदेश दिए हैं कि वह 10 दिन में केस से जुड़े दस्तावेज आयकर विभाग को सौंपे। कोर्ट ने सरकार को भी आदेश दिए हैं कि वह छह सप्ताह में जवाब दे कि इस मामले की जांच सीबीआई से क्यों न कराई जाए।

 
उल्लेखनीय है कि एसआईटी की पूछताछ में आरोपी महिलाओं ने करोड़ों रुपए के लेन-देन, कॉन्ट्रैक्ट लिए जाने का खुलासा किया था, जिसकी जांच आयकर विभाग ने भी शुरू कर दी थी। हाईकोर्ट की जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा, जस्टिस शैलेंद्र शुक्ल की डिवीजन बेंच के समक्ष विचाराधीन तीन याचिकाओं की सोमवार को सुनवाई हुई। आयकर विभाग ने भी अर्जी लगाई थी कि हनी ट्रैप से जुड़े मामले की वे भी जांच कर रहे हैं, इसलिए एसआईटी ने अब तक जितने भी दस्तावेज जब्त किए हैं, वह उपलब्ध कराए जाएं। 


 वहीं एसआईटी की ओर से कहा गया कि जो दस्तावेज जब्त किए हैं, उनके आधार पर हमारी जांच चल रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स कोर्ट के आदेश पर जांच के लिए गए हैं। अभी दस्तावेज नहीं दिए जा सकते। एसआईटी की ओर से महाधिवक्ता शशांक शेखर, अतिरिक्त महाधिवक्ता रवींद्रसिंह छाबड़ा ने पैरवी की। दो अंतरिम आवेदन भी पिछली सुनवाई पर दायर किए थे। 

याचिका : सरकार जैसी जांच चाहेगी, एसआईटी वैसी करेगी

अधिवक्ता धर्मेंद्र चेलावत ने केस सीबीआई को सौंपने, हाईकोर्ट की माॅनिटरिंग में कमेटी गठित करने मांग जनहित याचिका में की थी। कोर्ट को बताया कि एसआईटी का गठन सरकार ने अपने हिसाब से किया है। शासन जैसी जांच चाहेगा, 

सरकार :  एसआईटी डीजीपी ने गठित की, हमारा दखल नहीं

वैसी एसआईटी करके देगी। एेसे में निष्पक्षता का अभाव रहेगा। सरकार की ओर से कहा गया कि एसआईटी डीजीपी ने गठित की है। जांच में सरकार का दखल नहीं है। हाईकोर्ट ने सरकार को छह सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है।

कोर्ट ने 6 सप्ताह में सरकार से जवाब मांगा है, हम समय सीमा में उत्तर दे देंगे। इस केस में जो एजेंसियां शामिल हैं, सरकार उनका पूरा सहयोग कर रही है और आगे भी करेगी। -शशांक शेखर, महाधिवक्ता

हरभजन की मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक की याचिका खारिज
हरभजन सिंह ने इस मामले की मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की मांग की थी। इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट एेसे मामलों में आदेश दे चुका है कि मीडिया की स्वतंत्रता को इस तरह रोका नहीं जा सकता। आवेदक को वैसे भी प्रेस का‌उंसिल आॅफ इंडिया का रुख करना चाहिए था। कोर्ट ने हरभजन सिंह की अर्जी खारिज कर दी।  

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