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भोपाल / थाईलैंड एम्बेसी ने जिला विधिक प्राधिकरण से कहा- एक देश, एक कानून, फिर मध्यप्रदेश में विदेशियों से भेदभाव क्यों?

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भोपाल. देह व्यापार में पकड़ी गईं युवतियों के पक्ष में थाईलैंड एम्बेसी खड़ी हो गई है। एम्बेसी के प्रतिनिधियों ने जिला विधिक प्राधिकरण पहुंचकर कहा कि एक देश, एक कानून होने के बावजूद थाईलैंड की युवतियों के साथ विक्टिम की जगह आरोपी जैसा व्यवहार किया जा रहा है। एम्बेसी के प्रतिनिधियों ने कहा कि मुबंई और गोवा में देह व्यापार में पकड़ी गईं युवतियों को विक्टिम माना जाता है। इस मामले में थाईलैंड एम्बेसी के प्रतिनिधियों ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को एक पत्र देकर पकड़ी गईं युवतियों की कानूनी मदद करने की बात की है। मामले में प्राधिकरण ने एम्बेसी के द्वारा दिए गए पत्र को नेशनल विधिक सेवा प्राधिकरण भेज दिया है।

एम्बेसी के प्रतिनिधियों ने प्राधिकरण में कहा कि मुंबई और गोवा में देह व्यापार में पकड़ी गईं थाईलैंड की युवतियों को विक्टिम मानते हुए शेल्टर होम भेजा जाता है। उन्हें कानूनी सहायता दी जाती है, जबकि मप्र में उन्हें आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया। उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए। जमानत लेने के बाद उन्हें शहर में शेल्टर लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


प्राधिकरण के सचिव आशुतोष मिश्रा ने बताया कि मामले में मुंबई और गोवा से जानकारी मंगाई गई है। साथ ही थाईलैंड एम्बेसी द्वारा दिए गए पत्र को नेशनल विधिक सेवा प्राधिकरण भेजा है। वहां से जो भी दिशा-निर्देश मिलेंगे, उस पर काम किया जाएगा। फिलहाल थाईलेंड की देह व्यापार में पकड़ी गईं महिलाओं को विधिक सहायता दी गई है। उनका कहना है कि यह देखना हाेगा कि वास्तव में पकड़ी गईं युवतियां विक्टिम हैं भी या नहीं। पकड़ी गईं सभी थाईलैंड की युवतियों का प्रकरण कोर्ट में विचाराधीन है।

केवल नाबालिग ही है विक्टिम

सचिव का कहना है कि वैसे कानून के हिसाब से पकड़ी गई वह युवती, जिसे जबरदस्ती बंधक बनाकर देह व्यापार कराया जा रहा है या फिर नाबालिग लड़की ही विक्टिम मानी जाती रही है। मुंबई और गोवा से जानकारी मंगाई गई है कि विदेशी महिला काे कानून की किस धारा के तहत विक्टिम माना गया है। उसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा कि मामले में क्या करना है।

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