राजगढ़

शहर में खुलेआम घूम रहे आवारा मवेशी कुत्ते और सूअर का भी है आतंक। जानवरों के साथ रहना सिखा रही नगरपालिका ब्यावरा।

राजगढ़

 

ब्यावरा। नगर पालिका ने कुछ किया हो या नहीं मगर जानवरों के साथ रहना सिखा दिया,
यह हम नहीं निचली बस्ती और खुली कॉलोनी वासियों की व्याथा है।,
     शहर में आज नई नई कई योजनाओं की चर्चा होती है, बड़े-बड़े सपने देखे और दिखाए जाते हैं, शहर को नया बनाने की कोशिश की जा रही है, पर उनका क्या जो रात दिन जानवरों के साथ रह रहे हैं,

वहीं गत दिनों कलेक्टर मैडम के ब्यावरा दौरे पर नगर पालिका सीएमओ को ,स्वच्छता को लेकर डांट फटकार भी लगाई थी, फिर भी स्वच्छता की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है ,वहीं शहर के मध्य में आने वाला दर्शनीय शीतला माता मंदिर मुख्य र्शनीय स्थल माना जाता है ,जहां रोज श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं ,लेकिन वही फैला गंदगी के अंबार से पहले टकराना पड़ता है, तभी उस गंदगी के दर्शन के बाद कहीं माता के दर्शन हो पाते हैं, वही स्वच्छता को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है ,वही पेयजल की टंकी जहां शहर वासी अपने पीने का पानी भरकर ले जाते हैं ,वहीं गंदगी कचरे और आवारा सूअरों का अड्डा बना हुआ है, नगरपालिका के आला अधिकारी  कोई इस और ध्यान नहीं दे रहे हैं,
         बस्तियों मैं आवारा सुअर घूम रहे हैं, आवारा मवेशी जगह जगह मेन सड़कों तक पर बैठे घूमते दिखाई देते हैं, आवारा खजेलें कुत्ते भी घूम रहे हैं,  शायद उन्हें भी स्वतंत्रता का अधिकार नगर पालिका ही ने दिया है,। नगर पालिका कहती रही कि जानवरों के लिए काजी हाउस बनाएंगे, सूअरों को शहर से बाहर भेज देंगे।, आवारा कुत्तों को भी पकड़ लिया जाएगा, लेकिन क्या हुआ ,
ऐसा कुछ पिछले पांच वर्षों में नहीं हुआ और आज भी शहर में आवारा जानवर बेखौफ घूमते हैं, जानवर यदि आपको सिंग  मार दे या घायल कर दे उसकी जवाबदारी किसी की नहीं है,। यदि 2 सांड लड़ते हुए चलते बुजुर्गों को मार दे उसकी जवाबदारी किसी की नहीं है।, गाड़ी से अंधेरी रात में अचानक सूअरों, गायों  का झुंड आपकी गाड़ी से टकरा जाए उसकी जवाबदारी भी किसी की नहीं है।,
          आवारा जानवरों की तादाद से नगर के हालात ऐसे ही बनते दिखाई पढ़ रहे हैं, इस तरह के कई हादसे नगर में हुए हैं, कई पीड़ित जहां जानवरों की गलती मानकर उस पर अपना गुस्सा निकाल लेते हैं ,क्या सड़क पर जानवरों के कारण घायल हुए लोगों की सड़क पर चलने की गलती है , निचली बस्तियों में जानवर घूम रहे हैं, क्या यह बस्ती वालों की गलती है, 
 ऐसे तमाम सवाल है पर जवाब देने वाला कोई नहीं है।, आवारा जानवर यहां दो प्रकार के हैं, एक कुत्ता दूसरे आवारा मवेशी, बाजार तो बाजार शहर और जिला मुख्यालय के दफ्तरों के आसपास तक जानवरों की भीड़ दिखाई देती है। यह सब अधिकारी कांच चढ़ाकर अपनी गाड़ी में से देखता जाता है जो रोज होता है।,
     क्या इन आवारा जानवरों के लिए सरकारी कोई नियम कानून है कि नहीं है, यदि है तो उसका क्रियान्वयन क्यों नहीं होता , नेताओं की बात ही न करें क्योंकि उन्हें इनमें भी मतदाता दिखाई पड़ता है, नगरपालिका का कार्यकाल शनै  शनै समाप्ति की ओर निकल आया है, लेकिन नगर की अव्यवस्थाओं में कोई फर्क नहीं आया है।,